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mahabharat 8.83.38: तब चित्रसेन ने, जिसका शरीर पैरों से कुचला गया हो और जो क्रोध में विष उगलने वाला हो, विशाल सर्प के समान, लौटकर पांचाल के राजकुमार को तीन बाणों से तथा उसके सारथि को छः बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 83: भीमद्वारा दु:शासनका रक्तपान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद्‍गार  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  8.83.38 
संक्रान्तभोग इव लेलिहानो
महोरग: क्रोधविषं सिसृक्षु:।
निवृत्य पाञ्चालजमभ्यविध्य-
त्त्रभि: शरै: सारथिमस्य षड्‍‍भि:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तब चित्रसेन ने, जिसका शरीर पैरों से कुचला गया हो और जो क्रोध में विष उगलने वाला हो, विशाल सर्प के समान, लौटकर पांचाल के राजकुमार को तीन बाणों से तथा उसके सारथि को छः बाणों से घायल कर दिया।
 
Then Chitrasena, like a great serpent whose body had been trampled underfoot and who was about to vomit venom in anger, returned and shot the prince of Panchala with three arrows and his charioteer with six arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)