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mahabharat 8.82.d7: तुम लोग दिन-रात महान भय और चिन्ता में डूबे रहते थे, सुख-भोग से वंचित होकर वनों और पर्वतों की कन्दराओं में भटकते रहते थे। ऐसी स्थिति में एक दिन तुम सब पांचालराज के नगर में प्रवेश कर गए। वहाँ तुम सबने किसी मोह में प्रवेश करके अपनी पहचान छिपा ली; इसीलिए द्रौपदी ने तुममें से अर्जुन को चुना।   |   mahabharat अध्याय 8.82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 82: सात्यकिके द्वारा कर्णपुत्र प्रसेनका वध, कर्णका पराक्रम और दु:शासन एवं भीमसेनका युद्ध  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  8.82.d7 
महाभये रात्र्यहनी स्मरन्त-
स्तथोपभोगाच्च सुखाच्च हीना:।
वनेष्वटन्तो गिरिगह्वराणि
पाञ्चालराजस्य पुरं प्रविष्टा:॥
मायां यूयं कामपि सम्प्रविष्टा
यतो वृत: कृष्णया फाल्गुनो व:।
 
 
अनुवाद
तुम लोग दिन-रात महान भय और चिन्ता में डूबे रहते थे, सुख-भोग से वंचित होकर वनों और पर्वतों की कन्दराओं में भटकते रहते थे। ऐसी स्थिति में एक दिन तुम सब पांचालराज के नगर में प्रवेश कर गए। वहाँ तुम सबने किसी मोह में प्रवेश करके अपनी पहचान छिपा ली; इसीलिए द्रौपदी ने तुममें से अर्जुन को चुना।
 
Day and night you remained immersed in great fear and worries and deprived of pleasures and enjoyment, you roamed in forests and mountain caves. In this condition one day all of you entered the city of Panchalraj. There you all hid your identity by entering into some illusion; that is why Draupadi chose Arjun from among you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)