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mahabharat 8.81.42: उस समय सारी सेना मानो जल रही थी। बाणों से उसके कवच टुकड़े-टुकड़े हो गए थे और वह रक्त से लथपथ, खिले हुए अशोक वन के समान प्रतीत हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 8.81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  8.81.42 
आदीप्तमिव तत् सैन्यं शरैश्छिन्नतनुच्छदम्।
आसीत् सुशोणितक्लिन्नं फुल्लाशोकवनं यथा॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उस समय सारी सेना मानो जल रही थी। बाणों से उसके कवच टुकड़े-टुकड़े हो गए थे और वह रक्त से लथपथ, खिले हुए अशोक वन के समान प्रतीत हो रही थी।
 
At that time the entire army appeared as if it was burning. Its armour was torn to pieces by the arrows and it appeared like a blooming Ashoka forest, soaked in blood. 42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)