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mahabharat 8.81.25-26: हे राजन! तत्पश्चात् भीमसेन ने अपनी उस भयंकर गदा से, जो मृत्यु की रात्रि के समान भयंकर थी, मनुष्यों, हाथियों और घोड़ों को काल का भक्षण बना देने वाली, प्राचीर, बुर्जों और नगर की दीवारों को भी छेद डालने वाली, मनुष्यों, हाथियों और घोड़ों पर बड़े जोर से आक्रमण किया। उस गदा ने बहुत से घोड़ों और घुड़सवारों को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव वीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  8.81.25-26 
कालरात्रिमिवात्युग्रां नरनागाश्वभोजनाम्।
प्राकाराट्टपुरद्वारदारणीमतिदारुणाम्॥ २५॥
ततो गदां नृनागाश्वेष्वाशु भीमो व्यवासृजत्।
सा जघान बहूनश्वानश्वारोहांश्च मारिष॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तत्पश्चात् भीमसेन ने अपनी उस भयंकर गदा से, जो मृत्यु की रात्रि के समान भयंकर थी, मनुष्यों, हाथियों और घोड़ों को काल का भक्षण बना देने वाली, प्राचीर, बुर्जों और नगर की दीवारों को भी छेद डालने वाली, मनुष्यों, हाथियों और घोड़ों पर बड़े जोर से आक्रमण किया। उस गदा ने बहुत से घोड़ों और घुड़सवारों को मार डाला।
 
Respected King! Thereafter Bhimasena attacked the men, elephants and horses with great force with his dreadful mace which was as dreadful as the night of death, which made men, elephants and horses into the devouring of death, which also pierced ramparts, towers and city walls. That mace killed many horses and horsemen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)