श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  8.80.14-15h 
हतैर्गजमनुष्याश्वैर्भिन्नैश्च बहुधा रथै:।
विशस्त्रयन्त्रकवचैर्युद्धशौण्डैर्गतासुभि: ॥ १४॥
अपविद्धायुधैर्मार्ग: स्तीर्णोऽभूू्त् फाल्गुनेन वै।
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने वहाँ मार्ग को मारे हुए हाथियों, मनुष्यों और घोड़ों से, बहुत से टूटे-फूटे रथों से, अस्त्र-शस्त्रों, उपकरणों और कवचों से रहित प्राणहीन योद्धाओं से तथा इधर-उधर बिखरे हुए हथियारों से पाट दिया था ॥14 1/2॥
 
Arjuna had covered the road there with slain elephants, men and horses; with numerous chariots shattered and scattered; with lifeless warriors, devoid of their weapons, equipment and armour, and with weapons lying scattered here and there. ॥14 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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