श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका कौरव-सेनाको नष्ट करके आगे बढ़ना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  8.80.1-2 
संजय उवाच
राजन् कुरूणां प्रवरैर्बलैर्भीममभिद्रुतम्।
मज्जन्तमिव कौन्तेयमुज्जिहीर्षुर्धनंजय:॥ १॥
विसृज्य सूतपुत्रस्य सेनां भारत सायकै:।
प्राहिणोन्मृत्युलोकाय परवीरान् धनंजय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! कौरव सेना के प्रधान योद्धाओं ने कुन्तीपुत्र भीमसेन पर आक्रमण कर दिया था और वह सेनारूपी उस समुद्र में डूबता हुआ प्रतीत हो रहा था। भारत! उस समय उसे बचाने के लिए अर्जुन ने सारथिपुत्र की सेना को छोड़कर उस दिशा में आक्रमण किया और अपने बाणों से शत्रुओं के बहुत से योद्धाओं को यमलोक भेज दिया।॥1-2॥
 
Sanjaya says - O King! The chief warriors of the Kaurava army had attacked Kunti's son Bhimasena and he seemed to be drowning in that sea of ​​army. Bhaarat! At that time, to rescue him, Arjuna left the army of the son of a charioteer and attacked in that direction and with his arrows sent many of the enemy's warriors to Yamaloka.॥ 1-2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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