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mahabharat 8.79.94-95h: हे शत्रुओं को परास्त करने वाले राजा! स्वर्गलोक पहुँचने की इच्छा रखने वाले हाथीसवार, घुड़सवार और सारथी योद्धा बड़े जोर से गर्जना करते हुए और अच्छी तरह छोड़े हुए बाणों से एक-दूसरे को गहरी चोट पहुँचाते हुए अपने शत्रुओं पर टूट पड़े। 94 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 94-95h
 
 
श्लोक  8.79.94-95h 
जयेप्सव: स्वर्गमनाय चोत्सुका:
पतन्ति नागाश्वरथा: परंतप॥ ९४॥
जगर्जुरुच्चैर्बलवच्च विव्यधु:
शरै: सुमुक्तैरितरेतरं पृथक्।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को परास्त करने वाले राजा! स्वर्गलोक पहुँचने की इच्छा रखने वाले हाथीसवार, घुड़सवार और सारथी योद्धा बड़े जोर से गर्जना करते हुए और अच्छी तरह छोड़े हुए बाणों से एक-दूसरे को गहरी चोट पहुँचाते हुए अपने शत्रुओं पर टूट पड़े। 94 1/2॥
 
The king who defeats his enemies! The elephant riders, horse riders and charioteer warriors, eager to reach heaven, pounced upon their enemies, roaring loudly and inflicting deep wounds on each other separately with well-shot arrows. 94 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)