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mahabharat 8.79.58: उस वेगवान और अत्यंत वीर अर्जुन ने अपने अन्य साथी श्रीकृष्ण के साथ खाण्डववन में अग्निदेव को संतुष्ट किया था, जहाँ महात्मा श्रीकृष्ण को चक्र और पाण्डुपुत्र सव्यसाची अर्जुन को गाण्डीव धनुष प्राप्त हुआ था ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.79.58 
अतोषयत् खाण्डवे यो हुताशं
कृष्णद्वितीयोऽतिरथस्तरस्वी।
लेभे चक्रं यत्र कृष्णो महात्मा
धनुर्गाण्डीवं पाण्डव: सव्यसाची॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
उस वेगवान और अत्यंत वीर अर्जुन ने अपने अन्य साथी श्रीकृष्ण के साथ खाण्डववन में अग्निदेव को संतुष्ट किया था, जहाँ महात्मा श्रीकृष्ण को चक्र और पाण्डुपुत्र सव्यसाची अर्जुन को गाण्डीव धनुष प्राप्त हुआ था ॥58॥
 
That swift and extremely brave Arjuna, along with his other companion Shri Krishna, had satisfied Agnidev in Khandavavan, where Mahatma Shri Krishna got the Chakra and Pandu's son Savyasachi Arjuna got the Gandiva bow. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)