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mahabharat 8.79.46: पुरुषसिंह! आप इस समुद्ररूपी रणभूमि में एक द्वीप के समान हैं। ये समस्त कौरव आपकी शरण में आकर खड़े हो गए हैं, आपसे आश्रय पाने की आशा रखते हैं॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 8.79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 79: अर्जुनका कौरव-सेनाका विनाश करके खूनकी नदी बहा देना और अपना रथ कर्णके पास ले चलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे कहना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.79.46 
एते त्वां कुरव: सर्वे द्वीपमासाद्य संयुगे।
धिष्ठिता: पुरुषव्याघ्र त्वत्त: शरणकाङ्क्षिण:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! आप इस समुद्ररूपी रणभूमि में एक द्वीप के समान हैं। ये समस्त कौरव आपकी शरण में आकर खड़े हो गए हैं, आपसे आश्रय पाने की आशा रखते हैं॥ 46॥
 
Purushasingh! You are like an island in this ocean-like battlefield. All these Kauravas have come and stood in your refuge, hoping to get shelter from you. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)