श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 77: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार तथा भीमसेनसे शकुनिकी पराजय एवं दुर्योधनादि धृतराष्ट्रपुत्रोंका सेनासहित भागकर कर्णका आश्रय लेना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  8.77.33-34h 
स तै: परिवृत: शूरै: शूरो राजन् समन्तत:॥ ३३॥
शुशुभे भरतश्रेष्ठो नक्षत्रैरिव चन्द्रमा:।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! उन वीर पुरुषों से चारों ओर से घिरे हुए, वीरों में श्रेष्ठ भरत और भीम, तारों से घिरे हुए चंद्रमा के समान शोभायमान होने लगे॥33 1/2॥
 
Nareshwar! Surrounded on all sides by those brave men, Bharata and Bhima, the best of valiant men, started to become beautiful like the moon surrounded by stars. 33 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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