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श्लोक 8.77.26  |
तेनार्द्यमाना राजेन्द्र सेना तव विशाम्पते।
व्यभ्रश्यत महाराज भिन्ना नौरिव सागरे॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! हे प्रजानाथ! हे राजन! उनसे पीड़ित होकर आपकी सेना समुद्र में टूटे हुए जहाज के समान भटकने लगी॥ 26॥ |
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| O King! O Prajanath! O King! Your army, afflicted by them, began to go astray like a ship wrecked in the sea.॥ 26॥ |
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