श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका अपने सारथि विशोकसे संवाद  »  श्लोक d2-d4
 
 
श्लोक  8.76.d2-d4 
विशोक उवाच
सर्वं विदित्वैवमहं वदामि
तवार्थसिद्धिप्रदमद्य वीर॥
कैकेयकाम्बोजसुराष्ट्रबाह्लिका
म्लेच्छाश्च सुह्मा: परतङ्गणाश्च।
मद्राश्च वङ्गा मगधा: कुलिन्दा
आनर्तकावर्तका: पर्वतीया:॥
सर्वे गृहीतप्रवरायुधास्त्वां
संख्ये समावेष्टॺ ततो विनेदु:॥ )
 
 
अनुवाद
विशोक ने कहा, "वीर! आज मैं सब कुछ जानकर तुम्हारी मनोकामना पूर्ण करने वाली बात कह रहा हूँ। केकय, कम्बोज, सौराष्ट्र, बाह्लीक, म्लेच्छ, सुह्म, परतांगण, मद्र, वंग, मगध, कुलिन्द, आनर्त, आवर्त तथा पर्वतीय जाति के समस्त योद्धा अपने-अपने हाथों में श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र लेकर तुम्हें चारों ओर से घेरकर युद्धस्थल में शत्रुओं का सामना करने के लिए गर्जना कर रहे हैं।"
 
Vishoka said, "Valiant! Today, after finding out everything, I am telling you something that will fulfill your desire. All the warriors of Kekaya, Kamboja, Saurashtra, Bahlik, Mlechchha, Suhma, Paratangan, Madra, Vanga, Magadha, Kulinda, Anart, Aavart and the mountain people, with the best weapons in their hands, have surrounded you from all sides and are roaring to face the enemies in the battlefield.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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