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श्लोक 8.76.40  |
भीमसेन उवाच
ददानि ते ग्रामवरांश्चतुर्दश
प्रियाख्याने सारथे सुप्रसन्न:।
दासीशतं चापि रथांश्च विंशतिं
यदर्जुनं वेदयसे विशोक॥ ४०॥ |
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| अनुवाद |
| भीमसेन ने कहा- विशोक! तुम मुझे अर्जुन के आगमन की सूचना दे रहे हो। सारथि! मैं इस सुखद समाचार से अत्यन्त प्रसन्न हूँ; अतः तुम्हें चौदह बड़े-बड़े गाँवों की सम्पत्ति देता हूँ। इसके साथ ही तुम्हें सौ दासियाँ और बीस रथ भी पुरस्कार स्वरूप मिलेंगे। |
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| Bhimsena said- Vishoka! You are informing me of the arrival of Arjuna. Charioteer! I am very pleased with this pleasant news; therefore I give you the estate of fourteen big villages. Along with this, you will get a hundred maids and twenty chariots as a reward. 40. |
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इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि भीमसेनविशोकसंवादे षट्सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें भीमसेन और विशोकका संवादविषयक छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४३ १/२ श्लोक हैं।) |
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