|
| |
| |
श्लोक 8.76.28  |
विशोक उवाच
किं भीम नैनं त्वमिहाशृणोषि
विस्फारितं गाण्डिवस्यातिघोरम्।
क्रुद्धेन पार्थेन विकृष्यतोऽद्य
कच्चिन्नेमौ तव कर्णौ विनष्टौ॥ २८॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| विशोक ने कहा, "भीमसेन! क्या तुम अर्जुन द्वारा क्रोधपूर्वक खींचे जा रहे गाण्डीव धनुष की भयंकर ध्वनि नहीं सुन सकते? क्या तुम्हारे कान बहरे हो गए हैं?" |
| |
| Visoka said, "Bheemasena! Can't you hear the terrifying sound of the Gandiva bow being pulled by Arjuna in anger? Have your ears gone deaf?" |
| ✨ ai-generated |
| |
|