श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका अपने सारथि विशोकसे संवाद  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.76.12 
अरीन् विशोकाभिनिरीक्ष्य सर्वतो
मनस्तु चिन्ता प्रदुनोति मे भृशम्।
राजाऽऽतुरो नागमद् यत् किरीटी
बहूनि दु:खान्यभियातोऽस्मि सूत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
विशोक! सब ओर शत्रुओं को देखकर जो चिन्ता उत्पन्न हुई है, उससे मेरे हृदय को अत्यन्त व्याकुलता हो रही है; क्योंकि राजा युधिष्ठिर बाणों की चोट से पीड़ित हो रहे हैं और किरीटधारी अर्जुन अभी तक उनका समाचार लेकर नहीं लौटे हैं। सूत! इन सब कारणों से मैं अत्यन्त दुःखी हूँ॥ 12॥
 
Vishok! The anxiety that has arisen on seeing the enemies in all directions is troubling my heart very much; because King Yudhishthira is suffering from the blows of arrows and the crown-wearing Arjuna has not yet returned with news of him. Suta! I am very sad because of all these reasons.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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