श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 93-94h
 
 
श्लोक  8.73.93-94h 
सुवर्णपुङ्खा नाराचा: शत्रुघ्ना वैद्युतप्रभा:॥ ९३॥
त्वयास्तास्तस्य वर्माणि भित्त्वा पास्यन्ति शोणितम्।
 
 
अनुवाद
‘आपके द्वारा छोड़े गए शत्रु-विनाशक बाण, जो बिजली के समान चमक वाले और सोने के पंख वाले हैं, कर्ण के कवच को छेदकर उसका रक्त पी जाएँगे।॥ 93 1/2॥
 
‘The enemy-destroying arrows thrown by you, who have the radiance of lightning and wings of gold, will pierce the armour of Karna and drink his blood.॥ 93 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)