श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 88-89h
 
 
श्लोक  8.73.88-89h 
व्यक्तं षण्ढतिला ह्येते निरये च निमज्जिता:॥ ८८॥
प्रेष्यवच्चापि राजानमुपस्थास्यन्ति कौरवम्।
 
 
अनुवाद
‘निश्चय ही ये तिलों के समान नपुंसक हैं और नरक में डूब गए हैं। आज से ये दासों की भाँति कौरव राजा की सेवा में उपस्थित रहेंगे।’॥88 1/2॥
 
‘Surely these are as impotent as empty sesame seeds and have drowned in hell. From today onwards they will be present in the service of the Kaurava King like slaves.'॥ 88 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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