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mahabharat 8.73.50-51h: मैं यह कहना उचित समझता हूँ कि युद्धभूमि में तुम्हें पाकर सम्पूर्ण क्षत्रिय समाज एक ही दिन में नष्ट हो सकता है। ऐसा मेरा विश्वास है।   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  8.73.50-51h 
त्वां हि प्राप्य रणे क्षत्रमेकाहादिति भारत॥ ५०॥
नश्यमानमहं युक्तं मन्येयमिति मे मति:।
 
 
अनुवाद
मैं यह कहना उचित समझता हूँ कि युद्धभूमि में तुम्हें पाकर सम्पूर्ण क्षत्रिय समाज एक ही दिन में नष्ट हो सकता है। ऐसा मेरा विश्वास है।
 
I think it is reasonable to say that the entire Kshatriya community can be destroyed in one day after finding you on the battlefield. This is my belief. 50 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)