श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  8.73.30-31h 
तस्य चापच्युतैर्बाणै: परदेहविदारणै:॥ ३०॥
पूर्णमाकाशमभवद् रुक्मपुङ्खैरजिह्मगै:।
 
 
अनुवाद
उनके धनुष से छूटे हुए बाण शत्रुओं के शरीर को छेदने वाले थे, उनके पंख सुनहरे थे और वे सीधे लक्ष्य की ओर पहुँचते थे। सारा आकाश उन बाणों से भर गया था ॥30 1/2॥
 
‘The arrows shot from his bow were capable of piercing the bodies of enemies, they had golden wings and they reached straight towards the target. The entire sky was filled with those arrows. ॥ 30 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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