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mahabharat 8.73.29-30h: वह न केवल श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्रों का विशेषज्ञ था, अपितु उसने चेदि, काशी, पांचाल, करुष, मत्स्य और केकय देशों के पाण्डव पक्ष के योद्धाओं को अपने बाणों से आच्छादित कर उन्हें मृत्यु के घाट उतार दिया था।   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  8.73.29-30h 
स चेदिकाशिपाञ्चालान् करूषान् मत्स्यकेकयान्॥ २९॥
शरै: प्रच्छाद्य निधनमनयत् परमास्त्रवित्।
 
 
अनुवाद
वह न केवल श्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्रों का विशेषज्ञ था, अपितु उसने चेदि, काशी, पांचाल, करुष, मत्स्य और केकय देशों के पाण्डव पक्ष के योद्धाओं को अपने बाणों से आच्छादित कर उन्हें मृत्यु के घाट उतार दिया था।
 
He was not only an expert in the best weapons, he also covered the Pandava side's warriors from Chedi, Kashi, Panchala, Karusha, Matsya and Kekaya countries with his arrows and put them to death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)