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श्लोक 8.73.22-23h  |
धार्तराष्ट्रमुदग्रं हि व्यूढं दृष्ट्वा महद् बलम्॥ २२॥
यदि त्वं न भवेस्त्राता प्रतीयात् को नु मानव:। |
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| अनुवाद |
| यदि आप रक्षक न होते तो पंक्तिबद्ध खड़ी हुई धृतराष्ट्रपुत्रों की विशाल एवं बलवान सेना पर कौन आक्रमण कर सकता था?॥22 1/2॥ |
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| ‘If you were not the protector then who could have attacked the huge and powerful army of the sons of Dhritarashtra standing in formation?॥ 22 1/2॥ |
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