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श्लोक 8.73.125  |
एतत् कृत्वा महत् कर्म हत्वा कर्णं महारथम्।
कृतार्थ: सफल: पार्थ सुखी भव नरोत्तम॥ १२५॥ |
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| अनुवाद |
| पुरुषोत्तम पार्थ! अतः महारथी कर्ण को मारकर इस महान कार्य को पूर्ण करके आप कृतार्थ, सफल और सुखी होइए॥125॥ |
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| Purushottam Parth! Therefore, after completing this great task by killing the great warrior Karna, you become grateful, successful and happy. 125॥ |
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इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि श्रीकृष्णवाक्ये त्रिसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७३॥
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