श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  8.73.121 
पाण्डवान् सृञ्जयांश्चैव पञ्चालांश्चैव भारत।
हन्यादुपेक्षित: कर्णो रोगो देहमिवागत:॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
भारत! जिस प्रकार रोग का उपचार न किया जाए, वह शरीर को नष्ट कर देता है, उसी प्रकार यदि कर्ण की उपेक्षा की जाए, तो वह पाण्डवों, सृंजयों और पांचालों को भी नष्ट कर सकता है॥121॥
 
Bharat! Just as a disease which is not treated destroys the body, similarly if Karna is neglected, it can destroy the Pandavas, Srinjayas and Panchalas as well.॥ 121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)