श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  8.73.116 
अस्त्रं हि रामात् कर्णेन भार्गवादृषिसत्तमात्।
यदुपात्तं महाघोरं तस्य रूपमुदीर्यते॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने श्रेष्ठ मुनि भृगुनन्दन परशुराम से जो महान् अस्त्र प्राप्त किया है, उसका स्वरूप इस समय प्रकट हो रहा है ॥116॥
 
The form of the great weapon which Karna has received from the best sage Bhrigunandan Parshuram is being manifested at this time. 116॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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