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श्लोक 8.73.116  |
अस्त्रं हि रामात् कर्णेन भार्गवादृषिसत्तमात्।
यदुपात्तं महाघोरं तस्य रूपमुदीर्यते॥ ११६॥ |
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| अनुवाद |
| कर्ण ने श्रेष्ठ मुनि भृगुनन्दन परशुराम से जो महान् अस्त्र प्राप्त किया है, उसका स्वरूप इस समय प्रकट हो रहा है ॥116॥ |
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| The form of the great weapon which Karna has received from the best sage Bhrigunandan Parshuram is being manifested at this time. 116॥ |
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