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श्लोक 8.73.115  |
तद् भारत महेष्वासानगाधे मज्जतोऽप्लवे।
कर्णार्णवे प्लवो भूत्वा पञ्चालांस्त्रातुमर्हसि॥ ११५॥ |
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| अनुवाद |
| भरत! कर्णरूपी गहरे समुद्र में महाधनुर्धर पांचाल बिना नाव के डूब रहे हैं। तुम नाव बनकर उनका उद्धार करो॥115॥ |
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| Bharat! In the deep ocean of Karna, the great archer Panchala is drowning without a boat. You become a boat and save them.॥ 115॥ |
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