श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  8.73.115 
तद् भारत महेष्वासानगाधे मज्जतोऽप्लवे।
कर्णार्णवे प्लवो भूत्वा पञ्चालांस्त्रातुमर्हसि॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
भरत! कर्णरूपी गहरे समुद्र में महाधनुर्धर पांचाल बिना नाव के डूब रहे हैं। तुम नाव बनकर उनका उद्धार करो॥115॥
 
Bharat! In the deep ocean of Karna, the great archer Panchala is drowning without a boat. You become a boat and save them.॥ 115॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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