श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  8.73.114 
तांस्तथाभिमुखान् वीरान् मित्रार्थे त्यक्तजीवितान्।
क्षयं नयति राधेय: पञ्चालाञ्छतशो रणे॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
कर्ण युद्धभूमि में सैकड़ों पांचाल योद्धाओं का संहार कर रहा है जो अपने मित्रों के लिए प्राणों की परवाह न करते हुए शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध कर रहे हैं॥114॥
 
Karna is destroying hundreds of Panchala warriors on the battlefield who are fighting against the enemy without any attachment to their lives for the sake of their friends.॥ 114॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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