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mahabharat 8.73.112: जिस प्रकार अग्नि अपने पास आने वाले पतंगों के प्राण हर लेती है, उसी प्रकार वीर कर्ण अपने बाणों से आक्रमण करने वाले शक्तिशाली पांचालों के प्राण हर रहा है।   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  8.73.112 
तेषामापततां शूर: पञ्चालानां तरस्विनाम्।
आदत्तासूञ्शरै: कर्ण: पतङ्गानामिवानल:॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार अग्नि अपने पास आने वाले पतंगों के प्राण हर लेती है, उसी प्रकार वीर कर्ण अपने बाणों से आक्रमण करने वाले शक्तिशाली पांचालों के प्राण हर रहा है।
 
Just as fire takes away the lives of the kites that come near it, similarly the valiant Karna is taking away the lives of the powerful Panchalas who are attacking him with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)