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mahabharat 8.73.107-108h: जो पांचाल योद्धा अपने बाणों से ही समस्त पाण्डव सेना को घेर सकते थे, वे भीष्मजी के सामने आकर भी युद्ध से नहीं भागे। वही महाबली योद्धा कर्ण को सामने देखकर कैसे भाग सकता है?   |   mahabharat अध्याय 8.73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 107-108h
 
 
श्लोक  8.73.107-108h 
य एक: पाण्डवीं सेनां शरौघै: समवेष्टयत्।
तं समासाद्य पञ्चाला भीष्मं नासन् पराङ्मुखा:॥ १०७॥
ते कथं कर्णमासाद्य विद्रवेयुर्महारथा:।
 
 
अनुवाद
जो पांचाल योद्धा अपने बाणों से ही समस्त पाण्डव सेना को घेर सकते थे, वे भीष्मजी के सामने आकर भी युद्ध से नहीं भागे। वही महाबली योद्धा कर्ण को सामने देखकर कैसे भाग सकता है?
 
The Panchalay warriors never fled from the battle even after facing Bhishmaji who could encircle the entire Pandava army with his arrows alone. How can the same mighty warrior flee after seeing Karna in front of him?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)