श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 73: भीष्म और द्रोणके पराक्रमका वर्णन करते हुए अर्जुनके बलकी प्रशंसा करके श्रीकृष्णका कर्ण और दुर्योधनके अन्यायकी याद दिलाकर अर्जुनको कर्णवधके लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  8.73.102 
एते द्रवन्ति पञ्चाला वध्यमाना: शितै: शरै:।
कर्णेन भरतश्रेष्ठ पाण्डवानुज्जिहीर्षव:॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! कर्ण के तीखे बाणों से घायल होते हुए भी ये पांचाल योद्धा पाण्डव सैनिकों को बचाने की इच्छा से (कर्ण की ओर) दौड़ रहे हैं॥102॥
 
Best of the Bharatas! Even while being hit by Karna's sharp arrows, these Panchala warriors are running (towards Karna) with the desire to rescue the Pandava soldiers.॥ 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)