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mahabharat 8.71.9: हे माननीय! आज रणभूमि में तीखे बाणों से कर्ण को मारकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर के हृदय को अपार हर्ष से भर दीजिए॥9॥   |   mahabharat अध्याय 8.71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.71.9 
हत्वा तु समरे कर्णं त्वमद्य निशितै: शरै:।
विपुलां प्रीतिमाधत्स्व धर्मपुत्रस्य मानद॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे माननीय! आज रणभूमि में तीखे बाणों से कर्ण को मारकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर के हृदय को अपार हर्ष से भर दीजिए॥9॥
 
Honourable! Today, by killing Karna in the battlefield with sharp arrows, fill the heart of Dharma's son Yudhishthira with immense joy. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)