श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.71.6 
स भवान् धर्मभीरुत्वाद् ध्रुवमैष्यन्महत्तम:।
नरकं घोररूपं च भ्रातुर्ज्येष्ठस्य वै वधात्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अतः धर्म से भयभीत होने के कारण अपने बड़े भाई को मारकर तू अवश्य ही नरक के महान् अंधकार (दुःख) में डूब गया होगा॥6॥
 
Therefore, because you were fearful of Dharma, by killing your elder brother you would have certainly been plunged into the great darkness (sorrow) of hell.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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