श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.71.35 
अर्जुन उवाच
अद्य तं पापकर्माणं सानुबन्धं रणे शरै:।
नयाम्यन्तं समासाद्य राधेयं बलगर्वितम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - महाराज ! आज मैं उस पापी राधापुत्र कर्ण को, जो अपने बल पर गर्व करता है, रणभूमि में ढूँढ़कर उसके सगे-संबंधियों सहित मृत्यु के मुख में भेज दूँगा ॥35॥
 
Arjun said - Maharaj! Today I will find that sinful Radha's son Karna who is proud of his strength in the battlefield and will send him to death along with his relatives. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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