श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  8.71.33 
तमुत्थाप्य ततो राजा परिष्वज्य च पीडितम्।
मूर्ध्न्युपाघ्राय चैवैनमिदं पुनरुवाच ह॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा ने हृदय में पीड़ा अनुभव करने वाले अर्जुन को उठाकर छाती से लगा लिया और उसका सिर सूँघकर पुनः उससे इस प्रकार बोले -॥33॥
 
Thereafter the King picked up Arjuna who was feeling pain in his heart and hugged him to his chest and after smelling his head he spoke to him again as follows -॥ 33॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas