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पर्व 8: कर्ण पर्व
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अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद
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श्लोक 32
श्लोक
8.71.32
संजय उवाच
ततो धनंजयो राजञ्शिरसा प्रणतस्तदा।
पादौ जग्राह पाणिभ्यां भ्रातुर्ज्येष्ठस्य मारिष॥ ३२॥
अनुवाद
संजय कहते हैं - माननीय राजा! तब धनंजय ने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और दोनों हाथों से अपने बड़े भाई के चरण पकड़ लिए।
Sanjaya says - Honorable King! Then Dhananjaya bowed his head and saluted him and held the feet of his elder brother with both hands.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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