श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.71.30 
युधिष्ठिर उवाच
एह्येहि पार्थ बीभत्सो मां परिष्वज पाण्डव।
वक्तव्यमुक्तोऽस्मि हितं त्वया क्षान्तं च तन्मया॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "कुंतीपुत्र! तुम दुष्ट हो! आओ, आओ! पाण्डुपुत्र! मुझे गले लगाओ। तुमने ठीक कहा है और यह मेरे लिए हितकर है और मैंने इसके लिए तुम्हें क्षमा किया है।"
 
Yudhishthira said, "Son of Kunti! You are a wretch! Come, come! Son of Pandu! Embrace me. You have said the right thing and it is beneficial for me and I have forgiven you for that."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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