ततोऽब्रवीद् वासुदेव: प्रहसन्निव पाण्डवम्।
कथं नाम भवेदेतद् यदि त्वं पार्थ धर्मजम्॥ ३॥
असिना तीक्ष्णधारेण हन्या धर्मे व्यवस्थितम्।
त्वमित्युक्त्वाथ राजानमेवं कश्मलमाविश:॥ ४॥
अनुवाद
उसकी यह दशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कराते हुए पाण्डुपुत्र से कहा - 'पार्थ! राजा के 'तू' कहने मात्र से तुम इतने दुःखी हो गये हो। फिर यदि धर्म में स्थित धर्मपुत्र युधिष्ठिर को तीक्ष्ण तलवार से मार डालते, तो तुम्हारी क्या दशा होती?॥ 3-4॥
Seeing his condition, Lord Krishna smilingly said to the son of Pandu - 'Parth! You have become so sad just by the king saying 'tu' to you. Then if the son of Dharma, who was established in Dharma, had killed Yudhishthira with a sharp sword, what would have been your condition?॥ 3-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥