श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.71.20 
न चेदद्य हि तं वीरं निहनिष्यसि संयुगे।
प्राणानेव परित्यक्ष्ये जीवितार्थो हि को मम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यदि आज आप युद्धभूमि में वीर कर्ण को न मार डालें, तो मैं अपने प्राण त्याग दूँगा। फिर मेरे जीवन का क्या प्रयोजन है?॥20॥
 
If you do not kill the brave Karna on the battlefield today, I will give up my life. Then what is the purpose of my life?'॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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