श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.71.2 
इति स्म कृष्णवचनात् प्रत्युच्चार्य युधिष्ठिरम्।
बभूव विमना: पार्थ: किंचित् कृत्वेव पातकम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने युधिष्ठिर से जो अपमानजनक शब्द कहे थे, उनके कारण वे हृदय में इतने दुःखी हो गए मानो उन्होंने कोई पाप कर दिया हो।
 
Due to the derogatory words that Arjun had spoken to Yudhishthir at the behest of Lord Krishna, he became so sad in his heart as if he had committed a sin.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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