श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 71: अर्जुनसे भगवान् श्रीकृष्णका उपदेश, अर्जुन और युधिष्ठिरका प्रसन्नतापूर्वक मिलन एवं अर्जुनद्वारा कर्णवधकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका आशीर्वाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.71.1 
संजय उवाच
धर्मराजस्य तच्छ्रुत्वा प्रीतियुक्तं वचस्तत:।
पार्थं प्रोवाच धर्मात्मा गोविन्दो यदुनन्दन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! धर्मराज के मुख से ये प्रेमपूर्ण वचन सुनकर यदुवंश को सुख पहुँचाने वाले धर्मात्मा गोविन्द अर्जुन से कुछ कहने लगे॥1॥
 
Sanjay says- Maharaj! Hearing these loving words from the mouth of Dharmaraja, the virtuous Govind, who made Yadu clan happy, started saying something to Arjun. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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