श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 70: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञा-भंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको सान्त्वना देकर संतुष्ट करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  8.70.15 
प्रोक्त: स्वयं सत्यसंधेन मृत्यु-
स्तव प्रियार्थं नरदेव युद्धे।
वीर: शिखण्डी द्रौपदोऽसौ महात्मा
मयाभिगुप्तेन हतश्च तेन॥ १५॥
 
 
अनुवाद
नरदेव! आपसे प्रेम करने के लिए ही सत्यपुरुष भीष्म ने युद्ध में अपनी मृत्यु का समाचार वीर द्रुपदकुमार महारथी शिखण्डी को सुनाया था। मेरे द्वारा रक्षित होकर शिखण्डी ने उनका वध किया था। 15॥
 
Nardev! To love you, Bhishma, a man of truth, had told about his death in the battle to the brave Drupadkumar Shikhandi, a great man. Protected by me, Shikhandi killed them. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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