श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 7: कौरवपक्षके जीवित योद्धाओंका वर्णन और धृतराष्ट्रकी मूर्च्छा  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  8.7.6-7 
संजय उवाच
यस्मिन् महास्त्राणि समर्पितानि
चित्राणि शुभ्राणि चतुर्विधानि।
दिव्यानि राजन् विहितानि चैव
द्रोणेन वीरे द्विजसत्तमेन॥ ६॥
महारथ: कृतिमान् क्षिप्रहस्तो
दृढायुधो दृढमुष्टिर्दृढेषु:।
स वीर्यवान् द्रोणपुत्रस्तरस्वी
व्यवस्थितो योद्धुकामस्त्वदर्थे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! जिस वीर पुरुष को श्रेष्ठ ब्राह्मण द्रोणाचार्य ने चित्र, शुभ, दिव्य और धनुर्वेद में वर्णित चार प्रकार के महान् अस्त्र प्रदान किये थे, जो सफल प्रयत्न करने वाला महारथी है, जिसके हाथ अत्यन्त तीव्र गति से चलते हैं, जिसका धनुष, मुष्टि और बाण सभी प्रबल हैं, वह वेगशाली और पराक्रमी द्रोणपुत्र अश्वत्थामा आपके लिए युद्ध करने की इच्छा से युद्धभूमि में डटा हुआ है।
 
Sanjaya says - O King! The brave man to whom the best of Brahmins Dronacharya had bestowed the four types of great weapons - Chitra (amazing), Shubh (luminous), Divya and those mentioned in Dhanurveda, who is a great warrior who makes successful attempts, whose hands move very swiftly, whose bow, whose fist and whose arrows are all strong, that swift and valiant son of Drona, Ashwatthama, is standing firm in the battlefield, desiring to fight for you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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