श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 7: कौरवपक्षके जीवित योद्धाओंका वर्णन और धृतराष्ट्रकी मूर्च्छा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.7.28 
इत्येवमुक्त्वा वचनं धृतराष्ट्रोऽम्बिकासुत:।
भ्रान्तचित्तस्तत: सोऽथ बभूव जगतीपति:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर अम्बिकानन्दन राजा धृतराष्ट्र अचेत हो गये ॥28॥
 
Saying this, Ambikanandan King Dhritrashtra became unconscious. 28॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संजयवाक्यं नाम सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संजयवाक्यविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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