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श्लोक 8.65.9  |
ततोऽब्र्रवीदर्जुनो भीमसेनं
संशप्तका: प्रत्यनीकं स्थिता मे।
एतानहत्वाद्य मया न शक्य-
मितोऽपयातुं रिपुसङ्घगोष्ठात्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| तब अर्जुन ने भीमसेन से कहा, 'भैया! संशप्तक मेरे विरुद्ध खड़े हैं। उन्हें मारे बिना मैं आज इस शत्रु-सभा से बाहर नहीं जा सकता।'॥9॥ |
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| Then Arjuna said to Bhimasena, 'Brother! The Samshaptakas are standing against me. Without killing them, I cannot go out of this enemy gathering today.'॥9॥ |
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