श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 65: भीमसेनको युद्धका भार सौंपकर श्रीकृष्ण और अर्जुनका युधिष्ठिरके पास जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.65.3 
अपश्यमानस्तु किरीटमाली
युधिष्ठिरं भ्रातरमाजमीढम्।
उवाच भीमं तरसाभ्युपेत्य
राज्ञ: प्रवृत्तिं त्विह कुत्र राजा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
परंतु अपने भाई अजमीढ़वंशी युधिष्ठिर को न देखकर किरीटधारी अर्जुन बड़े वेग से भीमसेन के पास गए और उनसे राजा के विषय में पूछते हुए बोले - 'भैया! इस समय हमारे महाराज कहाँ हैं?'॥3॥
 
But not seeing his brother Yudhishthir, the son of the Ajamidha clan, the crown-wearing Arjun went to Bhimasena with great speed and asked him about the king and said - 'Brother! Where is our Maharaja at this time?'॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas