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mahabharat 8.64.54: जैसे वन में आग लग जाने पर उसमें रहने वाले हाथी जलकर इधर-उधर बेहोश होकर गिर पड़ते हैं, उसी प्रकार कर्ण द्वारा मारे गए पांचाल और चेदि योद्धा इधर-उधर बेहोश होकर पड़े रहे ॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  8.64.54 
ते वध्यमाना: कर्णेन पञ्चालाश्चेदिभि: सह।
तत्र तत्र व्यमुह्यन्त वनदाहे यथा द्विपा:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
जैसे वन में आग लग जाने पर उसमें रहने वाले हाथी जलकर इधर-उधर बेहोश होकर गिर पड़ते हैं, उसी प्रकार कर्ण द्वारा मारे गए पांचाल और चेदि योद्धा इधर-उधर बेहोश होकर पड़े रहे ॥ 54॥
 
Just as when a forest catches fire, the elephants living in it get burnt and fall unconscious here and there, similarly the Panchala and Chedi warriors killed by Karna lay unconscious here and there. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)