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mahabharat 8.64.53: हे नरसिंह! शत्रुओं को भस्म करने वाला एकमात्र योद्धा कर्ण, शत्रुओं को भस्म करती हुई धूमरहित अग्नि के समान शोभायमान हो रहा था।   |   mahabharat अध्याय 8.64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कौरव-सेनामें भगदड़ एवं दुर्योधनसे प्रेरित कर्णद्वारा भार्गवास्त्रसे पांचालोंका संहार  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  8.64.53 
कर्णस्त्वेको युधां श्रेष्ठो विधूम इव पावक:।
दहन् शत्रून् नरव्याघ्र शुशुभे स परंतप:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह! शत्रुओं को भस्म करने वाला एकमात्र योद्धा कर्ण, शत्रुओं को भस्म करती हुई धूमरहित अग्नि के समान शोभायमान हो रहा था।
 
Tiger of men! Karna, the only warrior who burns his enemies, was looking glorious like a smokeless fire burning his enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)