श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 61: कर्णद्वारा शिखण्डीकी पराजय, धृष्टद्युम्न और दु:शासनका तथा वृषसेन और नकुलका युद्ध, सहदेवद्वारा उलूककी तथा सात्यकिद्वारा शकुनिकी पराजय, कृपाचार्यद्वारा युधामन्युकी एवं कृतवर्माद्वारा उत्तमौजाकी पराजय तथा भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी पराजय, गजसेनाका संहार और पलायन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.61.30 
तत: स पार्षत: क्रुद्धो धनुश्चिच्छेद मारिष।
क्षुरप्रेण सुतीक्ष्णेन तत उच्चुक्रुशुर्जना:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
आर्य! तब द्रुपदपुत्र ने क्रोधित होकर अत्यन्त तीक्ष्ण छुरे से दु:शासन का धनुष काट डाला। यह देखकर सब लोग जयजयकार करने लगे।
 
Arya! Then the son of Drupada became furious and cut off Dushasan's bow with a very sharp razor. Seeing this, everyone started shouting. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)