श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक d1-d2
 
 
श्लोक  8.60.d1-d2 
(एते द्रवन्ति कुरवो भीमसेनभयार्दिता:।
त्यक्त्वा गजान् हयांश्चैव रथांश्चैव सहस्रश:॥
हस्त्यश्वरथपत्तीनां द्रवतां नि:स्वनं शृणु।
भीमसेनस्य निनदं द्रावयाणस्य कौरवान्॥ )
 
 
अनुवाद
ये कौरव योद्धा भीमसेन के भय से पीड़ित होकर अपने हजारों हाथियों, रथों और घोड़ों को छोड़कर भाग रहे हैं। भागते हुए हाथियों, घोड़ों, रथों और पैदलों का करुण क्रंदन और कौरवों का पीछा करते हुए भीमसेन की गर्जना सुनो।
 
‘These Kaurava warriors, afflicted by the fear of Bhimasena, are fleeing, abandoning their thousands of elephants, chariots and horses. Listen to the wailing cries of the fleeing elephants, horses, chariots and infantry and the roar of Bhimasena chasing the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)