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mahabharat 8.60.87: जिस प्रकार दुर्बल नेत्रों वाला मनुष्य मध्यान्ह के सूर्य को नहीं देख सकता, उसी प्रकार राजा लोग कुन्तीपुत्र भीमसेन को नहीं देख सकते।   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  8.60.87 
न शक्नुवन्ति वै पार्थं पार्थिवा: समुदीक्षितुम्।
मध्यंदिनगतं सूर्यं यथा दुर्बलचक्षुष:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार दुर्बल नेत्रों वाला मनुष्य मध्यान्ह के सूर्य को नहीं देख सकता, उसी प्रकार राजा लोग कुन्तीपुत्र भीमसेन को नहीं देख सकते।
 
Just as a person with weak eyes cannot look at the midday sun, similarly the kings are not able to look at Bhimasena, the son of Kunti. 87
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)