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mahabharat 8.60.66-67: धनंजय! ये महाबली पुरुषसिंह पांचालयोदशी भीमसेन के बल का आश्रय लेकर मनुष्य, हाथी, घोड़े, रथ और महाबली धृतराष्ट्र की सेना पर आक्रमण करके उसे धूल में मिला रहे हैं॥ 66-67॥   |   mahabharat अध्याय 8.60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 60: श्रीकृष्णका अर्जुनसे दुर्योधन और कर्णके पराक्रमका वर्णन करके कर्णको मारनेके लिये अर्जुनको उत्साहित करना तथा भीमसेनके दुष्कर पराक्रमका वर्णन करना  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  8.60.66-67 
निर्मनुष्यान् गजानश्वान् रथांश्चैव धनंजय॥ ६६॥
समाद्रवन्ति पञ्चाला धार्तराष्ट्रांस्तरस्विन:।
विमृद्नन्ति नरव्याघ्रा भीमसेनबलाश्रयात्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! ये महाबली पुरुषसिंह पांचालयोदशी भीमसेन के बल का आश्रय लेकर मनुष्य, हाथी, घोड़े, रथ और महाबली धृतराष्ट्र की सेना पर आक्रमण करके उसे धूल में मिला रहे हैं॥ 66-67॥
 
Dhananjaya! These mighty lions of men, taking recourse to the strength of the Panchalaya-yodahi Bhimasena, are attacking the devoid of men, elephants, horses, chariots and the mighty army of Dhritarashtra and reducing them to dust.॥ 66-67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)